दुनिया आज हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और उन्नत तकनीकों की ओर तेजी से बढ़ रही है। इस वैश्विक बदलाव की धुरी वे खनिज हैं जिन्हें हम रेयर अर्थ कहते हैं। चाहे इलेक्ट्रिक कार हो, मोबाइल फोन, विंड टरबाइन या फिर रक्षा उपकरण – हर जगह इन धातुओं की जरूरत पड़ती है। यही कारण है कि रेयर अर्थ तत्वों पर नियंत्रण किसी भी देश के लिए रणनीतिक बढ़त का साधन बन चुका है।

आज की सच्चाई यह है कि इस क्षेत्र में चीन का वर्चस्व निर्विवाद है। अमेरिका और यूरोप तक उसकी आपूर्ति पर निर्भर हैं। सवाल उठता है कि भारत, जिसके पास भी पर्याप्त भंडार है, वह इस अवसर को कितना भुना पा रहा है?


चीन का प्रभुत्व और उसकी चालें

चीन ने रेयर अर्थ उद्योग में धीरे-धीरे ही सही, लेकिन बेहद सोच-समझकर अपना वर्चस्व कायम किया।

  • तकनीकी विशेषज्ञता : चीन ने इस क्षेत्र में ऐसी विशेषज्ञता हासिल कर ली है जिसके बराबर पहुंचना पश्चिमी देशों के लिए आसान नहीं है। खनन से लेकर पृथक्करण और चुंबक उत्पादन तक – पूरी वैल्यू चेन पर उसकी पकड़ है।
  • निर्यात प्रतिबंध : दिसंबर 2023 में चीन ने रेयर अर्थ उत्खनन और तकनीक पर निर्यात प्रतिबंध लगाए। यह स्पष्ट संकेत है कि वह केवल आपूर्ति करने वाला देश नहीं रहना चाहता, बल्कि अपने प्रभुत्व को और मजबूत करना चाहता है।
  • लचर पर्यावरणीय नियम : चीन के उदार पर्यावरणीय कानूनों ने उसे फायदा पहुंचाया। 2002 में अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित माउंटेन पास खदान को प्रदूषण के चलते बंद करना पड़ा, जबकि चीन में बिना रोक-टोक उत्पादन बढ़ता गया।
  • वैश्विक हरित बदलाव : ईवी और नवीकरणीय ऊर्जा की मांग बढ़ते ही चीन ने मौके का फायदा उठाया। जब पश्चिम इन तकनीकों की ओर झुका, तब तक चीन पहले से तैयार था।

इन कारणों से आज चीन विश्व का लगभग 70-80 प्रतिशत रेयर अर्थ प्रसंस्करण नियंत्रित करता है।


भारत की स्थिति : अवसर बनाम चुनौतियाँ

भारत के पास रेयर अर्थ धातुओं का समृद्ध भंडार है, विशेषकर आंध्र प्रदेश, ओडिशा, झारखंड और केरल में। भारतीय रेयर अर्थ लिमिटेड (IREL) जैसी कंपनियां इस दिशा में काम कर भी रही हैं। लेकिन चुनौतियाँ बहुत हैं –

  1. तकनीकी क्षमता की कमी : चीन की तरह संपूर्ण वैल्यू चेन पर भारत की पकड़ नहीं है। उत्खनन और प्राथमिक प्रसंस्करण तक सीमित रहना हमें वैश्विक प्रतिस्पर्धा से दूर रखता है।
  2. नीतिगत ढिलाई : भारत में खनन नीतियों में पारदर्शिता और निवेश की रफ्तार धीमी है। निजी कंपनियों की भागीदारी सीमित रही है।
  3. पर्यावरणीय संतुलन : भारत चीन की तरह पर्यावरणीय नियमों को दरकिनार नहीं कर सकता। यहां समाज और न्यायिक संस्थाएं प्रदूषण पर सख्त निगरानी रखती हैं।
  4. वैश्विक सप्लाई चेन में भूमिका : फिलहाल भारत, चीन के सामने छोटा खिलाड़ी है। लेकिन पश्चिमी देशों की ‘चीन प्लस वन’ रणनीति हमें अवसर दे सकती है।

भारत बनाम चीन : तुलनात्मक दृष्टि

  • तकनीक : चीन पूरी चेन पर नियंत्रण रखता है, भारत अभी शुरुआती स्तर पर है।
  • लागत : चीन की ढीली पर्यावरणीय नीतियों से लागत कम रहती है, जबकि भारत में सख्ती से लागत बढ़ती है।
  • निर्यात नीति : चीन प्रतिबंधों के जरिए दबाव बनाता है, भारत के पास अभी आक्रामक रणनीति नहीं है।
  • रणनीतिक बढ़त : चीन ने रेयर अर्थ को भू-राजनीतिक हथियार बना लिया है, भारत अभी इसे अवसर की तरह देख रहा है।

भारत के लिए आगे की राह

भारत अगर सही समय पर कदम उठाए तो इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है। कुछ ठोस कदम जरूरी हैं –

  1. तकनीकी निवेश : भारत को खनन से लेकर चुंबक उत्पादन तक की पूरी वैल्यू चेन में तकनीकी विशेषज्ञता विकसित करनी होगी।
  2. वैश्विक साझेदारी : अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ साझेदारी हमें तकनीक और बाजार दोनों दिला सकती है।
  3. नीतिगत सुधार : खनन क्षेत्र में पारदर्शी नीलामी और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ानी होगी।
  4. आत्मनिर्भरता मिशन : जिस तरह सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स पर PLI योजनाएँ चलाई जा रही हैं, वैसे ही रेयर अर्थ पर भी विशेष प्रोत्साहन योजनाएँ होनी चाहिए।
  5. पर्यावरणीय संतुलन : चीन की तरह प्रदूषण को नजरअंदाज करने का विकल्प भारत के पास नहीं है। इसलिए हमें स्वच्छ खनन तकनीकों पर ध्यान देना होगा।

भारत का अवसर, लेकिन समय क

आज रेयर अर्थ पर चीन का दबदबा है और अमेरिका तक उसकी आपूर्ति पर निर्भर है। लेकिन यह भी सच है कि भारत जैसे देशों के लिए यह बड़ा अवसर है। अगर हम अपने भंडार का वैज्ञानिक और तकनीकी उपयोग करें, वैश्विक साझेदारी बढ़ाएं और पर्यावरणीय संतुलन के साथ उत्पादन करें, तो आने वाले दशक में भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अहम खिलाड़ी बन सकता है।

रेयर अर्थ केवल खनिज नहीं हैं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और रणनीतिक शक्ति का आधार हैं। चीन ने यह बात समझकर बढ़त ले ली। भारत अगर समय रहते जागे, तो दुनिया के इस नए ऊर्जा-युग में अपनी ठोस पहचान बना सकता है।